बुल मार्किट का चरित्र और लक्षण
दोस्तों कहते है की अगर किसी को ट्रेडिंग में सफल होना हो तो सबसे पहले उसे ट्रेंड को समझने की आवश्यकता है बिना ट्रेंड को समझे कोई भी ट्रेड करेगा तो उन्हें नुकसान होना तय है।
अब ट्रेंड को समझने से पहले आपको मार्किट को समझना होगा, आपको ये समझना होगा की वर्तमान में मार्किट किस तरह की है वो बुल है या बेयर जब आप ये समझ लेते है तो फिर ट्रेंड को समझना आसान हो जाता है।
मार्किट की बात करे तो वो दो होते है पहला बुल और दूसरा बेयर और इनदोनो मार्किट में तीन तरह के ट्रेंड हो सकते है, अपट्रेंड , डाउन ट्रेंड और साइडवेज। बुल मार्किट हो या बेयर मार्किट ये बहुत ही सालो तक चलता है. और इनके चलने की एक अलग ही पहचान या चरित्र होते है आप आसपास हो रहे चीजों के अनुसार बुल या बेयर मार्किट का पता लगा सकते है और आप फिर आसानी से ट्रेड कर सकते है।
दोस्तों जब बुल मार्किट की शुरुआत हो रही होती है तो उस समय सारी चीजे बहुत ही ख़राब होती है कुछ भी अच्छा नहीं हो रहा होता है, हर जगह बस निराशा ही निराशा नजर आती है लोग परेशान होते है, कम्पनिया लोस्स में चल रही होती है, हर समय बस यही सुनाई देता है की मानो सबकुछ ख़तम हो चूका है अब कुछ भी नहीं हो सकता सब बर्बाद हो जाएगा किसी में इतनी हिम्मत नहीं होती है की वो स्टॉक के बारे में सोच भी पाए अगर कोई स्टॉक खरीदने के बारे में बोल भी दे तो उस व्यक्ति को लोग बहुत ही गंदे तरीके से देखने लगता है। और बस यही एक ऐसा समय होता है जब मार्किट के स्टॉक का गिरना बंद हो जाता है और धीरे धीरे स्टॉक ऊपर निकलना शुरू कर देती है और जब स्टॉक ऊपर जाना शुरू करती है तो किसी के अंदर विश्वास नहीं होता है की वो ऊपर भी जा सकती है और लोग स्टॉक को खरीदने से बचते रहते है।
दोस्तों बुल मार्किट का शुरूआती फेज इतनी ज्यादा चुनौतीपूर्ण होती है की उसमे बड़े से बड़े निवेशकों की हालत ख़राब रहती है और खबरे इतनी ख़राब होती है की लोग स्टॉक के ऊपर जाने पर सिर्फ एक ही बात बोलती है जैसे ये मार्किट अब निचे गिरेगा और मार्किट को निचे गिरना ही होगा लोग स्टॉक खरीदने की वजाय उनके ऊपर जाने से भी नाराज होने लगते है और स्टॉक है की वो ऊपर ही ऊपर जाता चला जाता है जब मार्किट बहुत ही ज्यादा ऊपर की तरह आ जाती है तो फिर कंपनियों के रिजल्ट भी अच्छे आने लगते है न्यूज़ भी थोड़ी बहुत अच्छी आने लगती है और लोगो के अंदर इतनी हिम्मत आ जाती है की वो थोड़े बहुत स्टॉक खरीद भी पाए पर फिर अचानक से एक तरह का डाउन ट्रेंड शुरू हो जाता है और जो भी लोग अच्छे ख़बर सुनके या फिर हाल में ही स्टॉक लिए होते है वो अचानक घबड़ा जाते है और एक तरह से स्टॉक में फस जाते है। इस तरह बुल मार्किट की शुरूआती फेज को अपट्रेंड कहते है और उसमे जो गिरावट आती है उसे करेक्शन या डाउन टर्न या डाउन ट्रेंड कहते है।
दोस्तों बुल मार्किट की अपट्रेंड बहुत ही तेज होती है और उसमे काम करना बहुत ही आसान होता है ठीक इसी तरह बेयर मार्किट में डाउन ट्रेंड बहुत ही ज्यादा तेज होती है इसमें काम करना बहुत ही मुश्किल होता है।
दोस्तों बुल मार्किट जो होती है उनमे भी आपको तीन फेज दिखने को मिलता है अपट्रेंड, डाउन ट्रेंड और साइडवेज। अपट्रेंड में भाव ऊपर की तरफ जाती है, डाउन ट्रेंड में निचे और साइडवेज में मार्किट एक जगह पर खड़ी होती है। बुल मार्किट में डाउन ट्रेंड और साइडवेज को हम करेक्शन भी बोलते है पर बहुत लोग बुल मार्किट के करेक्शन को बेयर मार्किट समझ के अपना पैसा गवाते है क्युकी जब बुल मार्किट में जो करेक्शन आती है उस समय काफी सारी ख़राब ख़राब खबरे आने लगती है और लोग डर के मारे मार्किट से बाहर निकलते लगते है।
दोस्तों बुल मार्केट के दौरान ज्यादातर जो करेक्शन होती है वो साइडवेज होती और ये फेज तब आती है जब मार्किट में बहुत बड़ी चाल आ चुकी होती है जैसे की हम 2021 से 2022 के बिच देख रहे है इस करेक्शन फेज को हम डाउन ट्रेंड भी कह सकते है। दोस्तों ये जो करेक्शन वाली फेज होती है वो बहुत ही दुखदायी होती है क्युकी इस फेज में इन्वेस्टर का पैसा तो नहीं बनता पर उसे बुरी तरह से परेशान किया जाता है, मार्किट इस फेज में बस ऊपर निचे करती रहती है लोगो को बहुत ही परेशान करती रहती है और लोग जब बुरी तरह से परेशान हो जाता है या फिर उन्हें लगने लगता है की मार्किट में अब कुछ नहीं बचा तब मार्किट ऊपर चलने की तैयारी करना शुरू कर देती है और जो इस समय खबरे होती है वो बहुत ही ख़राब होती है लोग डरे हुए होते है और मार्किट फिर से ऊपर चलना शुरू करती है और वो तबतक ऊपर जाती रहती है जबतक की चीजे या खबरे पूरी तरह से ठीक नहीं हो जाए और जब मार्किट में सारी चीजे सही हो जाएगी तो फिर मार्किट अपना दूसरा करेक्शन शुरू कर देगी। इसी तरह का खेल पुरे बुल मार्किट में चलते रहता है। पहले एक बड़ी चाल (अपट्रेंड ) फिर एक छोटी सी गिरावट (डाउन ट्रेंड) और फिर बड़ी चाल।
दोस्तों जो बुल मार्किट है वो बहुत ही लम्बे समय के लिए होता है जैसे की हमारी भारतीय मार्किट की बात करे तो ये 40 साल से बुल मार्किट में है और आगे भी इनके चलते रहने की पूरी संभावनाए है और ये बुल मार्किट कब तक चलेगा ये कह पाना अभी संभव नहीं है हाँ पर इसके ख़तम होने के कुछ समय बाद आप जान जाएंगे पर ख़तम होने से पहले इसकी बात करना मूर्खता हो सकती है हाँ पर जब ये ख़तम होनेवाला रहेगा तो आप लोगो की बाते को सुनकर अंदाजा लगा पाएगे। जैसे की जब बुल मार्किट ख़तम होने पर रहेगा तो उस समय ऐसे लोग मार्किट में आना चाहेंगे जो पहले स्टॉक मार्किट का नाम भी नहीं सुना होगा इन नए लोगो के अंदर मार्किट को लेकर के बहुत ही आशाये होगी और खबरे बहुत ही ज्यादा अच्छी होगी उस समय ऐसा लगने लगेगा की अब तो बस मार्केट ही है एक ऐसा जगह है जहा से बहुत सारा पैसा आ सकता है। दोस्तों जब भी ऐसा कुछ सुनाई देने लगे तो समझ लेना की बुल मार्किट अब ख़तम होने वाला है और काफी लम्बे समय के लिए बेयर मार्किट शुरू हो सकती है।
संक्षेप में :-
मार्किट दो तरह के होते है बुल और बेयर।
बुल या बेयर में तीन तरह के फेज होते है अपट्रेंड, डाउन ट्रेंड और साइडवेज इन फेज को करेक्शन या डाउन टर्न भी कहा जाता है।
बुल मार्किट में ज्यादातर करेक्शन साइड वेज आती है।
बुल मार्किट या बेयर मार्किट काफी लम्बे अवधि के लिए होती है जैसे की 30 से 40 साल।
बुल मार्किट हमेशा बेयर मार्किट से बड़ी होती है।
दोस्तों ये ब्लॉग भविष्य में आपके बहुत ही काम आ सकती है आप इन्हे हमेशा संभाल कर अपने पास रखे क्युकी जब भी आपको मार्किट में हो रही चीजे को देखकर कोई दुविधा होगी तो आप इसे दोबारा पढ़ के अपने दुविधा को दूर कर पाएंगे।
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